ए चाँद अपनी आगोश में रख ले मुझ को
न जाने क्यूं तेरी चांदनी मन को भाती है
मैं सोच में डूबा रहता हूँ, न जाने कब
यह रात तुझे साथ लेकर गुजर जाती है !!
न जाने क्यूं तेरी चांदनी मन को भाती है
मैं सोच में डूबा रहता हूँ, न जाने कब
यह रात तुझे साथ लेकर गुजर जाती है !!
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