ख़ूबसूरती पल भर के लिए खुदा ने बक्शी है तुमको
क्यूं इस पर इतना गुमान कर के खुद जल रहे हो
काया और माया का क्या कहना पता होगा शायद
इस ने लूट लिया है जमाने को, अपने गुमान की खातिर !!
अजीत तलवार
मेरठ
क्यूं इस पर इतना गुमान कर के खुद जल रहे हो
काया और माया का क्या कहना पता होगा शायद
इस ने लूट लिया है जमाने को, अपने गुमान की खातिर !!
अजीत तलवार
मेरठ
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