तुम अछे ही नहीं, तुम बहुत अच्छे हो,
तुम्हारे जज्बात तुम से भी अच्छे हैं
तुम्हारी भावनाओ की कद्र करता है यह दिल
तुम अच्छे विचारो का इक नदिया हो !!
क्या कोमल सा दिल पाया है तुमने
खुदा ने भी नूर बरसाया है , तुम पे
अच्छे भाव का सार बना कर भेजा है उसने
तभी तो दुनिया में अपनाया है , हमने
अजीत तलवार
मेरठ
तुम्हारे जज्बात तुम से भी अच्छे हैं
तुम्हारी भावनाओ की कद्र करता है यह दिल
तुम अच्छे विचारो का इक नदिया हो !!
क्या कोमल सा दिल पाया है तुमने
खुदा ने भी नूर बरसाया है , तुम पे
अच्छे भाव का सार बना कर भेजा है उसने
तभी तो दुनिया में अपनाया है , हमने
अजीत तलवार
मेरठ
No comments:
Post a Comment