कितनी भी दूर क्यों न चला जाये हमसफर मेरा
वो याद जरूर करेगा चाहे कितनी उलझन में हो
वकत का दरिया जैसे बहता हुआ चला जाता है
बस वो कभी वकत के हाथो, मजबूर न हो !!
अजीत तलवार
मेरठ
वो याद जरूर करेगा चाहे कितनी उलझन में हो
वकत का दरिया जैसे बहता हुआ चला जाता है
बस वो कभी वकत के हाथो, मजबूर न हो !!
अजीत तलवार
मेरठ
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