तेरी हर आह पर मेरा दम निकल जाता है
में सोचता हूँ, क्यूं ये दिल उभर आता है
तेरे प्यार पे कुर्बान कर दूं में अपना जीवन
फिर यह कहाँ किसी के काम आता है !!
अजीत तलवार
मेरठ
में सोचता हूँ, क्यूं ये दिल उभर आता है
तेरे प्यार पे कुर्बान कर दूं में अपना जीवन
फिर यह कहाँ किसी के काम आता है !!
अजीत तलवार
मेरठ
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