बेवजह किसी की किसी के साथ तकरार नहीं होती
मिलने का दिल करे, तो फिर मुलाकात ही नहीं होती
सोचता चला जाता हूँ में पथ पर यूं अकेला मेरे यार
सोचते सोचते भी यह रात मेरा साथ नहीं देती !!
अजीत तलवार
मेरठ
मिलने का दिल करे, तो फिर मुलाकात ही नहीं होती
सोचता चला जाता हूँ में पथ पर यूं अकेला मेरे यार
सोचते सोचते भी यह रात मेरा साथ नहीं देती !!
अजीत तलवार
मेरठ
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