रहनुमा बन के संवार दे जो जीवन को
उस के इंतज़ार में गुजर रही जिन्दगी
तकदीर बाकि क्या रहा है अभी देखना
क्यों तू जा कर उस को यह बताती नहीं !!
अजीत तलवार
मेरठ
उस के इंतज़ार में गुजर रही जिन्दगी
तकदीर बाकि क्या रहा है अभी देखना
क्यों तू जा कर उस को यह बताती नहीं !!
अजीत तलवार
मेरठ
No comments:
Post a Comment