Friday, 25 April 2014

मेरी नजर पे न रख तू अपनी नजर
यह खुद ही होश में नहीं है
मैने लाख चाहा की नजर में रह 
पर बंदा भी अब होश में नहीं है !!

अजीत तलवार
मेरठ

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