आसमान की तरफ देखता हूँ.तो
इक प्यारा सा ख्वाब नजर आता है
वो लम्हा तेरी जुदाई का मुझ को
पता नहीं क्यूं , याद बार बार आता है !!
अजीत तलवार
मेरठ
इक प्यारा सा ख्वाब नजर आता है
वो लम्हा तेरी जुदाई का मुझ को
पता नहीं क्यूं , याद बार बार आता है !!
अजीत तलवार
मेरठ
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