Monday, 21 April 2014

में हूँ, एक खुली किताब
चाहे पढ़ लो या फाड़ दो
पर हर लफ्ज अपनी जुबान
से कुछ सिखा कर ही जायेगा !!
कुछ सिखा था अपने बुजुर्गो से
वही बाँट कर यह बंदा गुजर जायेगा !!

अजीत तलवार
मेरठ

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